* चयन प्रकिया –

[1]- परीक्षा  (Objective Type Question) 

[2] – साक्षात्कार (कृषि सैम्पल किट्स)

नोट
1)-    फील्ड प्रयोगात्मक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही अभ्यर्थी का चयन सुनिश्चित माना जाता है तथा वह फार्म क्लीनिक (Farm Clinic) को संचालित करने की पात्रता पूर्ण कर लेता है, क्योंकि फिल्ड प्रयोगात्मक परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है जिसके माध्यम से यह देखा जाता है कि उम्मीदवारों की मोटिवेशन क्षमता कितनी है ? फिल्ड का अनुभव कैसा है ? किसान से उसके संबंध कैसे हैं ? वह संस्थान व अपने कैरियर के प्रति कितना संघर्षशील है ?
    ताकि वह इस परियोजना के माध्यम से समय-समय पर किसान गोष्ठी (कृषि चौपाल) कराना, किसान ‘प्रक्षेत्र भ्रमण’ कराना, किसान मेलों का आयोजन कराना, बीज उत्पादन कराना, पर्यावरण संरक्षण हेतु ग्रामीण अंचलों में वृक्षारोपण कराना, मृदा परीक्षण कराना आदि कार्य को आसानी से करा सके एवं पिछड़े व सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक उच्च कृषि प्रौद्योगिकी को आसानी से पहुंचाया जा सके, यानी Product एवं Technology दोनों के द्वारा कृषि का वैज्ञानिकरण विकास हो सके तथा भारत सरकार की द्वितीय हरित क्रांति की योजना को बढ़ावा मिल सके | इसी आशय से फिल्ड प्रयोगात्मक परीक्षा के अंतर्गत ‘कृषि एवं पर्यावरण’ से संबंधित ‘कृषि सैंपल किट्स’ जो प्रमुख शोध संस्थानों के रिसर्च प्रोडक्ट द्वारा तैयार करके किया जाता है, जिसका कुल मूल्य 1 लाख रुपया होता है, जिसमे से 60 हजार रुपया अंश की भागीदारी उम्मीदवार की तथा शेष धनराशि 40 हजार रूपया का योगदान संस्थान के प्रोजेक्ट का होता है | फिल्ड प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु प्रयुक्त ‘कृषि किट्स सैंपल’ मे मुख्यतया बीज उत्पादन का कार्य कराया जाता है जो रवि व खरीफ सीजन के बीजों ( गेहूं, चना, मटर, सरसों, मसूर, धान, अरहर आदि ) को चयनित किसानों के खेतों में लगवाया जाता है एवं संस्थान द्वारा ‘उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था’ के यहां उसका पंजीकरण कराकर समय-समय पर संस्थान व कृषि विभाग के अधिकारियों व वैज्ञानिकों द्वारा प्रक्षेत्र भ्रमण करके फसल की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है | मानक के अनुरूप बीच की उच्चतम क्वालिटी आ जाने पर इस बीज को कपास संस्थान सरकार के समर्थन मूल्य पर खरीदारी कर लेता है, तथा आवेदक की प्रयोगात्मक परीक्षा पूर्ण मानी जाती है एवं उसे ‘फार्म क्लीनिक’ आवंटित कर दिया जाता है |

2)-    फील्ड प्रयोगात्मक परीक्षा के अंतर्गत दिए जाने वाले ‘कृषि सैम्पल किट्स’ में उच्च गुणवत्ता युक्त बीजों को दिया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रजातियों के फाउंडेशन व ब्रीडर स्तर के बीजों को रखा जाता है |
     कृषि सैंपल किड्स के अंतर्गत जो प्रोडक्ट (सामग्री) आवेदक को दिया जाता है, उसे एक माह के अन्दर-अन्दर ब्लाक / न्याय पंचायत स्तर पर निर्धारित मूल्य पर चयनित किसानों को वितरित करने के बाद पुनः फिल्ड से जब 1 लाख  रुपया आ जाता है, तो उसमें से 60 हजार रुपये को उम्मीदवार स्वयं रख लेता है, उसे दोबारा संस्थान में जमा नहीं करना होगा तथा शेष धनराशि 40 हजार रुपये संस्थान के बैंक खाते में जमा कराना होगा | इस तरह से उसकी फिल्ड प्रयोगात्मक परीक्षा भी पूर्ण हो जाती है तथा उसके द्वारा लगाया गया धनराशि भी वापस हो जाता है |

3)-    फील्ड प्रैक्टिकल टेस्ट के दौरान जो सामग्री (Product) निर्धारित मूल्य पर चयनित किसानों को वितरित की जाएगी, उसका विवरण पंजीकृत रजिस्टर पर देना होगा, जिसमें किसान का नाम, पता, मोबाइल नंबर, सामग्री वितरण, खतौनी की फोटो कॉपी, आधार कार्ड फोटो आदि सुनिश्चित करना होगा ताकि उसका पंजीकरण संस्थान द्वारा ‘उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था’ के कार्यालय में आसानी से कराया जा सके | फिल्ड प्रैक्टिकल टेस्ट के दौरान परियोजना सहायकों के कार्यों का अवलोकन / सत्यापन संस्थान की Selection Committee करेगी |

4)-     लाइसेंस व अन्य प्रमाण-पत्र निर्गत होने के बाद प्रोपराइटर (परियोजना सहायक) जिले में स्थित किसी भी अधिकृत विक्रेता से आवश्यकतानुसार उचित मूल्य देकर विभिन्न सामग्रियों को खरीद व बेच सकते हैं | बशर्ते स्टाक व विक्री रजिस्टर मेंटेन होना चाहिए |

5)-     ‘फार्म क्लीनिक’ आवंटन के बाद परियोजना सहायकों को संस्थान से लगभग 5 लाख रुपये का वार्षिक प्रोडक्ट (रवि, खरीफ, जायद और बागवानी आदि) सीजन के सामग्रियों की खरीदारी करनी होगी, जिसका 50% धनराशि स्वेच्छा से जमा कर प्राप्त कर सकेगा | संस्थान समस्त सामग्रियों को थोक मूल्य पर देगी और उसे फुटकर मूल्य पर बेचकर परियोजना सहायक स्वयं लाभ प्राप्त कर सकेगा | संस्थान द्वारा दिया गया अतिरिक्त धनराशि २.५ लाख रुपया को Product Sale होने पर वापस करने होंगे | जिससे कि वह संस्थान के प्रोजेक्ट व प्रोडक्ट दोनों से जुड़ा रहते हुए परियोजना सहायक के पद पर बने रह सके |

6)-     ‘फार्म क्लीनिक’ के वित्तीय सहयोग हेतु आर्थिक रूप से कमजोर परियोजना सहायको (प्रोपराइटर) को संस्थान द्वारा बैंक ऋण हेतु एक प्रोजेक्ट फाइल बनवाकर संस्थान के लेटर पैड पर सक्षम पदाधिकारियों द्वारा स्वीकृत करा कर बीज, उर्वरक, कीटनाशी दवा के लाइसेंस व अन्य प्रमाण पत्रों की फोटो कॉपी, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बयान हल्फी, फोटो आदि को संलग्न करके संबंधित बैंक की शाखा प्रबंधक को भेजकर प्रथम चरण में 5 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का ऋण स्वीकृत कराया जाएगा जो शाखा प्रबंधक द्वारा बैंक में फार्म क्लीनिक (Farm Clinic) के नाम से चालू खाता (Current Account) खोलवाकर स्वीकृत धनराशि खाते में क्रेडिट कर दी जाएगी | स्वीकृति ऋण के संपूर्ण ब्याज का 50% अंश का भुगतान संस्थान वहन करेगा | शेष धनराशि बैंक के नियम अनुसार परियोजना सहायक (प्रोपराइटर) को जमा करने होंगे |

7)-     फ्रेंचाइजी कार्यालय सह फार्म क्लीनिक के संचालकों / पदाधिकारियों को अपने केंद्र से विभिन्न कृषि सामग्रियों को खुदरा मूल्य पर वितरित (Sale) करने के लिए प्रोडक्ट के निर्देशानुसार संस्थागत लाइसेंस व अन्य प्रमाण पत्रों को प्राप्त करना होगा, जिसके लिए प्रमाण पत्र सिक्योरिटी धनराशि के रूप में किसी राष्ट्रीकृत बैंक से संस्थान के बैंक अकाउन्ट में रुपया 21000 /- का RTGS या NEFT कराना होगा | जिस धनराशि को फिल्ड प्रयोगात्मक परीक्षा पूर्ण होने एवं लाइसेन्स व अन्य प्रमाणपत्र निर्गत होने के बाद अथवा स्वेच्छा से त्याग पत्र देने पर वापस कर दिया जायेगा |

8)-     ‘फार्म क्लीनिक’ (Farm Clinic) के संचालकों (Project Assistant) को प्रोजेक्ट के निर्देशानुसार अपने क्षेत्रों में ‘कपास किसान क्लब’ का गठन करके समय-समय पर कृषि चौपाल आदि विभिन्न कृषि कार्यक्रमों का संचालन कराना होगा |